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:: مدايح بیصله | و چون نوبت ملاحان... |
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| نویسنده: ندا.ح, در ۱۱ / ۰۷ / ۸۶ |
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85  |
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و چون نوبت ِ ملاحان ِ ما فرارسد
آن خونريز ِ بيدادگر
در جزيرهی مغناتيس
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بر دو پای
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استوار بايستد
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زخم ِ آخرين را
خنجری برهنه به دنداناش.
پس دريا
به بانگي خاموش
ايشان را آواز دردهد.
ملاحان
از زيباترين ِ دختران
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دست بازدارند
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و در بالاخانههای محقر ِ ميکدهی بارانداز
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به خود رها کنند،
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خوابگردْوار
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در زورقهای زنگار
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پارو بردارند.
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و به جانب ِ ميعاد ِ مقدّر ِ ظلمت
شتاب کنند.
۱۳۵۷
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